सब्र करो एक दिन हमारी भी ऊंची औकात होगी!
बदमाशी में ही सही, पर चर्चे बहुत हैं हमारे !!
हम वहाँ ठहरते हैं जहाँ लोगों की सोच भी नहीं जाती।
हमारे कद के बराबर अभी तक ना आ सके जो लोग,
दुश्मनों की नींद उड़ाने का हुनर आज भी है।
हरा कर कोई जान भी ले जाए तो मंजूर है मुझको
बदमाशी हमारी read more आदत नहीं, विरासत होती है !!
लेकिन जरूरत पड़ी तो हम खौफनाक भी हो सकते हैं।
ना भीड़ का हिस्सा हैं, ना किसी के पीछे चलते हैं,
क्योंकि आग से खेलने वाले अक्सर जल जाते हैं।
क्योंकि हम बदमाशी में भी कला ढूंढते हैं।
भूचाल मचा देंगे बेटा हम भी किसी से कम नहीं..!!
जो हमें रोकने की कोशिश करेगा, पछताएगा।
निगाहें झुकी नहीं, चाहे वक़्त कैसा भी आया,